जर्मनी में काम करने वालों की कमी कोई अफ़वाह नहीं है। अस्पतालों में नर्सें पूरी नहीं पड़तीं, ट्रक खड़े रहते हैं क्योंकि ड्राइवर नहीं मिलते, और घर में बिजली का काम करवाना हो तो कारीगर का इंतज़ार हफ़्तों तक चला जाता है। यही वजह है कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने अपने इमिग्रेशन क़ानून खोले हैं और बाहर के हुनरमंदों के लिए नए रास्ते बनाए हैं।
दिक़्क़त यह है कि हमारे यहाँ यह ख़बर आधी पहुँचती है। “जर्मनी को बंदे चाहिएँ” वाला जुमला हर जगह गूँजता है, उसके साथ वाला जुमला कहीं गुम हो जाता है: जर्मनी को ऐसे बंदे चाहिएँ जो जर्मन बोल सकें। दरवाज़ा वाक़ई खुला है, मगर उसमें एक ही चाबी लगती है — जर्मन ज़बान। लोग समझते हैं कागज़ मुश्किल हैं और ज़बान बाद की बात है। हक़ीक़त उलटी है। कागज़ सीधे हैं, असल रुकावट ज़बान है, और जो इंसान आज से क्लास शुरू कर दे वह इस दौड़ में उन सबसे आगे निकल जाता है जो एजेंट के दफ़्तर में बैठे हैं।
तो आइए इत्मीनान से एक-एक दरवाज़ा देखते हैं — कौन-सा किसके लिए है, और कहाँ खड़े होकर लोग ठोकर खाते हैं।
Chancenkarte — नौकरी ढूँढने के लिए एक साल
जर्मनी का नया पॉइंट्स वाला कार्ड उस बात पर बना है जो बाक़ी यूरोप में कम मिलती है: आपके पास जॉब ऑफ़र न भी हो तो भी आप एक साल जर्मनी में रहकर नौकरी ढूँढ सकते हैं। पॉइंट्स आपकी पढ़ाई या हुनर, तजुर्बे, उम्र, ज़बान (जर्मन या अंग्रेज़ी) और जर्मनी से पहले के किसी ताल्लुक़ पर मिलते हैं।
मगर यहाँ वह बात साफ़ कर लें जिस पर सबसे ज़्यादा ग़लतफ़हमी है। यह कार्ड हर किसी के लिए नहीं है। बुनियादी शर्त यह है कि आपके पास मान्यता-प्राप्त डिग्री हो या कम से कम दो साल की वोकेशनल ट्रेनिंग, और उसके साथ बुनियादी जर्मन (A1) या अंग्रेज़ी B2 का सर्टिफ़िकेट। जिसके पास इनमें से कुछ नहीं, उसके लिए यह कार्ड नहीं खुलता, चाहे एजेंट कुछ भी कहे।
दूसरी शर्त पैसा है: एक साल के ख़र्चे का सबूत, यानी ब्लॉक अकाउंट या यह दिखाना कि आप पार्ट-टाइम काम से गुज़ारा कर लेंगे। कार्ड पर हफ़्ते में बीस घंटे काम की इजाज़त होती है। और नौकरी मिल जाए तो कार्ड वर्क परमिट या ब्लू कार्ड में बदल जाता है। पढ़े-लिखे और हुनरमंद नौजवानों के लिए यह इस वक़्त यूरोप के बेहतरीन क़ानूनी रास्तों में से एक है — बशर्ते आप उस शर्त पर पूरे उतरते हों। पॉइंट्स का पूरा हिसाब हमने अलग लेख में खोलकर लिखा है।
Ausbildung — वह रास्ता जो आपको सीखने के पैसे देता है
अगर इस पूरे लेख से आपको सिर्फ़ एक बात याद रखनी हो तो यह रखें। जर्मनी का Ausbildung सिस्टम दो से तीन साल की अमली ट्रेनिंग है जो आप किसी कंपनी के साथ समझौता करके करते हैं, और जिसके दौरान आपको हर महीने तनख़्वाह मिलती है। आख़िर में एक सरकारी, मान्यता-प्राप्त सनद मिलती है जो पूरे जर्मनी में चलती है।
इस एक जुमले को दोबारा पढ़ें: सीखने के पैसे दिए जाते हैं, लिए नहीं जाते। हमारे यहाँ यूरोप का हर रास्ता लाखों माँगकर शुरू होता है — यह अकेला बड़ा रास्ता है जहाँ पहले महीने से आमदनी शुरू हो जाती है। नर्सिंग, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, होटल, बेकरी, लॉजिस्टिक्स — सैकड़ों क्षेत्र खुले हैं। वीज़े के लिए आम तौर पर जर्मन B1 और कंपनी का ट्रेनिंग कॉन्ट्रैक्ट दरकार होता है।
और यही वजह है कि हम इसे सबसे हक़ीक़त-पसंद रास्ता कहते हैं: जिस नौजवान के पास न ऊँची डिग्री है न लाखों की फ़ीस, उसके लिए जर्मनी में इससे ठोस कोई मंसूबा नहीं। Ausbildung पूरा करने वालों को नौकरी लगभग पक्की मिलती है और स्थायी रिहाइश का रास्ता खुल जाता है। मैट्रिक या इंटर के बाद जो लड़का या लड़की सोच रहे हैं कि अब क्या करें — जर्मन सीखकर Ausbildung इस नस्ल का सबसे समझदार फ़ैसला है। इस पर हमारा अलग तफ़सीली लेख मौजूद है।

वर्क वीज़ा और EU Blue Card
यह उन लोगों के लिए है जिनके पास पहले से जॉब ऑफ़र है। उसूल सीधा है: आपकी डिग्री या वोकेशनल सनद जर्मनी में मान्यता-प्राप्त (Anerkennung) होनी चाहिए और किसी जर्मन मालिक (नियोक्ता) की तरफ़ से नौकरी की पेशकश मौजूद होनी चाहिए। डिग्री की हैसियत आप ख़ुद anabin डेटाबेस में देख सकते हैं, और यह काम आज ही मुफ़्त में हो सकता है — किसी एजेंट की ज़रूरत नहीं।
जिनके पास डिग्री है और अच्छी तनख़्वाह की ऑफ़र है, उनके लिए EU Blue Card है। तनख़्वाह की सालाना कम से कम हद सरकार तय करती है और IT जैसे कमी वाले क्षेत्रों में यह हद कुछ कम रखी जाती है। इस रास्ते की सबसे बड़ी ख़ूबी रफ़्तार है — स्थायी रिहाइश सबसे जल्दी इसी से मिलती है।
एक तीसरी सूरत भी है जो कम लोगों को मालूम है: नए क़ानून में कुछ क्षेत्रों में डिग्री के बिना भी, सिर्फ़ साबित हुए तजुर्बे और मुनासिब तनख़्वाह की बुनियाद पर रास्ता मौजूद है। अगर आपने बरसों किसी एक हुनर में काम किया है और आपके पास उसका बाक़ायदा रिकॉर्ड है, तो यह विकल्प देखने लायक़ है।
स्टडी वीज़ा
जर्मनी की सरकारी यूनिवर्सिटियों में ट्यूशन फ़ीस लगभग शून्य है। यह सुनकर लोग अक्सर यक़ीन नहीं करते, मगर बात यही है — ख़र्चा सिर्फ़ रिहाइश और खाने का है। वीज़े के लिए ब्लॉक अकाउंट में लगभग एक साल का ख़र्च जमा दिखाना होता है, अंदाज़न ग्यारह से बारह हज़ार यूरो, और यह रक़म हर साल बदलती है, इसलिए दूतावास की ताज़ा सूची ज़रूर देखें।
छात्रों को काम की इजाज़त है, और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी ढूँढने के लिए ठहरने की मुद्दत बढ़ाई जा सकती है। अंग्रेज़ी में मास्टर्स के प्रोग्राम बहुत हैं, और यही वह जगह है जहाँ लोग एक ख़ामोश ग़लती करते हैं: वे सोचते हैं अंग्रेज़ी प्रोग्राम है तो जर्मन की ज़रूरत नहीं। पढ़ाई के लिए शायद न हो, मगर नौकरी की मार्केट में जर्मन के बिना आपके मौक़े आधे रह जाते हैं। डिग्री जर्मन यूनिवर्सिटी की हो और ज़बान न आती हो, तो इंटरव्यू के कमरे तक पहुँचना ही मुश्किल हो जाता है।
फ़ैमिली री-यूनियन
जर्मनी में क़ानूनी तौर पर रह रहे लोग अपने जीवनसाथी और नाबालिग़ बच्चों को बुला सकते हैं। यह रास्ता सीधा है मगर कागज़ी तौर पर बारीक — शादी के प्रमाणपत्र की तसदीक़, नामों की spelling, रिहाइश और आमदनी का सबूत। और यहाँ भी ज़बान सामने आ जाती है: आने वाले जीवनसाथी से आम तौर पर बुनियादी जर्मन (A1) का सबूत माँगा जाता है। अगर आपके घर का कोई सदस्य जर्मनी में है और आपको आना है, तो क्लास आज ही शुरू कर दें, वीज़ा फ़ाइल खुलने का इंतज़ार न करें।

शरण के बारे में — बिना लाग-लपेट
यह हिस्सा सबसे कड़वा है, और इसीलिए सबसे ज़रूरी। पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश के नागरिकों की शरण की अर्ज़ियाँ जर्मनी में बहुत बड़ी तादाद में ख़ारिज होती हैं, क्योंकि ये देश जर्मन सिस्टम में आम तौर पर “ख़तरे वाले देश” नहीं गिने जाते।
और ख़ारिज होने के बाद क्या होता है? Duldung — यानी अस्थायी बर्दाश्त। नाम से लगता है कोई रियायत है, अमल में यह बरसों की बे-यक़ीनी है: काम पर पाबंदियाँ, कैंप की ज़िंदगी, और देश-निकाले का लगातार ख़तरा सिर पर। और यह भी समझ लें कि जर्मनी में स्पेन जैसा Arraigo सिस्टम नहीं है — यानी बरसों बिना कागज़ रहकर बाद में क़ानूनी हो जाने का कोई दरवाज़ा यहाँ खुला नहीं है।
जिस इंसान पर वाक़ई ज़ुल्म हुआ है, जिसकी जान को सचमुच ख़तरा है, उसका पूरा हक़ है कि अर्ज़ी दे। यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून का माना हुआ उसूल है। मगर आर्थिक मक़सद के लिए शरण का रास्ता जर्मनी में तबाह करने वाली रणनीति है, और एजेंट यह सच कभी नहीं बताता। जितना पैसा और जितना वक़्त इस रास्ते पर लगता है, उतने ही पैसे और वक़्त से जर्मन B1 सीखकर Ausbildung का वीज़ा लिया जा सकता है — और नतीजा कैंप की जगह तनख़्वाह, और डर की जगह सनद।
ज़बान — यहीं फ़ैसला होता है
हर रास्ते के बयान में आपने देखा होगा कि घूम-फिरकर बात एक ही जगह आती है। इसलिए सीधी बात: जर्मनी के लिए असल इम्तिहान वीज़ा फ़ॉर्म नहीं, B1 है। एक संजीदा छात्र के लिए A1 से B1 तक पहुँचना आम तौर पर दस से पंद्रह महीने का काम है। यह लंबा लगता है, मगर एजेंट के पीछे बर्बाद होने वाले सालों से बहुत कम है।
तैयारी के लिए ये दो बातें ज़हन में रखें:
- Goethe-Institut के कोर्स और इम्तिहान — पाकिस्तान और भारत के बड़े शहरों में इनके केंद्र मौजूद हैं।
- मुफ़्त और सस्ते ऑनलाइन ज़रियों से A1 से B1 तक तैयारी बिल्कुल मुमकिन है, मगर वीज़े के लिए सर्टिफ़िकेट किसी मान्यता-प्राप्त संस्था का होना चाहिए — Goethe, telc या ÖSD।
तो आपके लिए कौन-सा रास्ता?
अगर आपके पास डिग्री और जॉब ऑफ़र दोनों हैं — सीधा वर्क वीज़ा या ब्लू कार्ड, यही सबसे तेज़ है। अगर डिग्री या दो साल की वोकेशनल सनद है मगर ऑफ़र नहीं — Chancenkarte देखें और कार्ड के इंतज़ार में ज़बान B1 तक ले जाएँ। अगर आपने अभी इंटर किया है या हाथ का कोई काम आता है और जेब ख़ाली है — Ausbildung, बेझिझक। अगर पढ़ाई का इरादा है और कुछ पूँजी है — स्टडी वीज़ा, मगर जर्मन साथ-साथ। और अगर घर का कोई सदस्य पहले से वहाँ है — फ़ैमिली री-यूनियन, A1 से शुरुआत।
इन सब रास्तों में सरकारी फ़ीस चंद सौ यूरो से आगे नहीं जाती। जब कोई आपसे लाखों माँगे तो वह वीज़े के पैसे नहीं ले रहा, आपकी बेख़बरी के पैसे ले रहा है।
सरकारी वेबसाइटें — तसदीक़ यहीं से करें
नीचे दिए गए तीनों ज़रिये सरकारी हैं और मुफ़्त हैं। कोई भी बड़ा फ़ैसला करने से पहले अपनी जानकारी यहाँ से मिला लें, क्योंकि हदें और रक़में हर साल बदलती हैं।
- जर्मनी का सरकारी इमिग्रेशन पोर्टल (हिन्दी में नहीं, मगर अंग्रेज़ी में पूरा): make-it-in-germany.com
- डिग्री की पहचान और हैसियत: anabin.kmk.org
- वीज़े की तफ़सील और चेकलिस्ट: अपने देश में जर्मन दूतावास की वेबसाइट
यह लेख आपको जर्मनी का सिस्टम समझाने के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। तनख़्वाह की हदें, ब्लॉक अकाउंट की रक़म और पॉइंट्स की शर्तें लगभग हर साल बदलती हैं, और हर इंसान के हालात अलग होते हैं। अर्ज़ी देने से पहले ऊपर दी गई सरकारी वेबसाइट या अपने शहर के जर्मन दूतावास से आँकड़ों की तसदीक़ ज़रूर कर लें।